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दुनिया में शीतल पेय का जनक (Founder of Cocacola): आसा केंडलर

आज भारत में बहस छिड़ी हुई है कि क्या कोकाकोला का संस्थापक शिंकजी बेचा करता था। तो आज हम आपको बताते है कि कोका कोला का संस्थापक शिकंजी नहीं बेचा करता था, वह एक दवाई विक्रेता है और उसने किस प्रकार से कोकाकोला का सम्राज्य खड़ा किया। दुनिया उन्हीं को सलाम करती है जो अपना रास्ता स्वयं बनाना जानते हैं। आसा केंडलर भी एक ऐसा ही नायक है जिसने अपना ‘रास्ता’ स्वयं खोजा और दुनिया के समक्ष सफलता की नवीन मिसाल रखी। आज न केवल अमेरिका बल्कि समूची दुनिया में केंडलर द्वारा स्थापित कोका-कोला, अपनी अलग पहचान बना चुकी है। असा केंडलर ने ही दुनिया को सर्वप्रथम ‘साफ्ट डिंªक्स’ के स्वाद से अवगत कराया।

Munh se painṭing karane vaalaa shakhsah henaree frijar

vah ragbee kaa prasiddh khilaadee thaa. Ragbee usakaa joonan thee lekin kismat ko kuchh hee tej bhaagate kadamon ko jaise kisee kee najar lag koii. Ek haadase unake saare aramaanon ko maṭiyaameṭ kar diyaa ab ragbee unake lie ek sapanaa see ban ga_ii. Huaa yoon ki varṣ 2009 men purtagaal men chhuṭṭee maanane ke lie ga_e the doston ke saath tairaagee ke dauraan henaree kaa sir patthar se ṭakaraa gayaa aur unake sir aur reeḍh kee haḍaḍaee par gnbheer choṭe lagee. Lekin henaree frijar aise shakhs kahaan haar maanane vaale hote hai unhonne to bas apanaa sapanaa hee dikhaa_ii detaa hai, unhen bas kaise n kaise apanee mnjil paanee hotee hai.

Safalataa kyaa hai? (what is success)

safal kaise banaa jaa_e? Yah ek jaṭil prashn hai. Safalataa koii chidiyaa naheen jise jaal mne fnsaa kar pinjare men bnd kar liyaa jaa_e yaa fir safalataa ped par naheen lagatee jise todakar khaa liyaa jaa_e. Safalataa naam hai sngharṣ kaa, yojanaa_on ko amal men laane kaa, prayaason, aashaa_on kaa, dhairy kaa. Kuchh logon ke lie safalataa maatr dhan kamaanaa hai, maatr dhan kamaane ko bhee safalataa naheen maanaa jaa sakataa. Dhan to safalataa kaa puraskaar maatr haiai. Samaaj men aksar aise log bhee dekhe jaa sakate hain, jo dhan-dhaany se sapann hone ke baavajood maanasik roop se sntuṣṭ naheen hai. Dhan-daulat hone par bhee aatmik roop se sntuiṣṭ naheen to aisee dhan-daulat kis kaam kee. Safal hone ke lie dhan ke saath aatmik tripti bhee atiaavashyak hotee hai. Ise hee safalataa kaa naam diyaa jaa sakataa haiai. Safalataa ke lie pratyek vyakti laalaayit rahataa hai, aur ho bhee kyon n safalataa jeevan kaa lakṣy jo hotee hai . Pratyek vyakti ke lie safalataa ke bhinn-bhinn roop ho …

Abhipreraṇa (Motivation)

lakṣy nirdhaaraṇa ke pashchaat safalataa kee dishaa men agalaa kadam hotaa hai abhipreraṇa arthaat moṭiveshan. Lakṣy kaa nirdhaaraṇa hone tathaa usakaa spaṣṭ tathaa saarthak chitraa mastiṣk men sthaapit karane ke pashchaat vyakti ko us lakṣy kee praapti kee dishaa men svayn ko moṭiveṭ karate rahanaa chaahiye. Moṭiveshan nimn teen kaarakon se milakar banaa hai

एक ऐसा शख्स जो अपने पैरों से कार चलता है

मनुष्य के पास यदि साहस हो तो वह कुछ भी करके दिखा सकता इसकी जीती जागती मिशाल है विवेक अग्निहोत्री। सात वर्ष की आयु में ही विक्रम के दोनों हाथ करंट लगने से खराब हो गए थे और उन्हें काटना पड़ता था। हाथ मनुष्य का सहारा होते है और वे ही काट दिए जाए तो समझो उसकी दुनिया की उजड़ गई। दोनों हाथ कटने के बाद भी विक्रम ने हार नहीं मानी थी, परंतु आपको सुनकर हैरानी होगी कि वह हाथ से होने वाले काम पैरों के सहारे कर लेते हैं। वह को तैराकी कर लेते हैं और कार भी चला लेते हैं। उन्होंने रेग्युलर स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी की है। उनके  पास मास्टर डिग्री है और वह मोटिवेशनल स्पीकर होने के साथ ही गैस एजेंसी भी चलाते हैं।

मुँह से पैंटिंग करने वाला शख्स: हेनरी फ्रिजर

वह रग्बी का प्रसिद्ध खिलाड़ी था। रग्बी उसका जूनन थी लेकिन किस्मत को कुछ ही तेज भागते कदमों को जैसे किसी की नजर लग कोई। एक हादसे उनके सारे अरमानों को मटियामेट कर दिया अब रग्बी उनके लिए एक सपना सी बन गई। हुआ यूं कि वर्ष 2009 में पुर्तगाल में छुट्टी मानने के लिए गए थे दोस्तों के साथ तैरागी के दौरान हेनरी का सिर पत्थर से टकरा गया और उनके सिर और रीढ़ की हड्डी पर गंभीर चोटे लगी। लेकिन हेनरी फ्रिजर ऐसे शख्स कहां हार मानने वाले होते है उन्होंने तो बस अपना सपना ही दिखाई देता है, उन्हें बस कैसे न कैसे अपनी मंजिल पानी होती है। हेनरी फ्रेलर ने हार नहीं मानी उन्हें हाथ-पैरों से लाचार होने के बावजूद  मुँह से पैंटिंग करना शुरू कर दिया।

विकलांगता के बावजूद भी अपनी मंजिलों पर पहुँची मुनिबा मजारी

मुनिबा मजारी को पाकिस्तान की आयरन लेडी माना जाता है। वे संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पाकिस्तान की नेशनल एम्बेस्डर हैं। मुनिबा का जन्म एक बलोच पुरिवार में हुआ था। मुनिबा बचपन में पेंटर बनना चाहती थीं लेकिन रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखने के कारण वे ऐसा नहीं कर पाई । 18 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता के कहने के लिए मजबूर होना पड़ा। शादी के दो-तीन साल बा हुई एक दुर्घटना ने उनके जीवन को बदल कर रखा दिया। एक दिन वह अपने पति के साथ कहीं जा रही रही थी कि उनका पति कार चलाते हुए सो गए और गाड़ी के बेकाबू हो जाने के बाद वो खुद बाहर कूद गए मगर मुनिबा कार के अंदर रह गईं। दुर्घटना में बुरी तरह घायल हुईं। ढाई महीनों तक अस्पताल में रहने के दौरान जब वो बाहर आईं तो पहले की तरह वो अपने पैरों पर खड़ी होने लायक नहीं थीं। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि वो अब कभी माँ भी नहीं बन सकेंगी। इस बात ने मुनिबा को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया उसकी तो समझो बस जिंदगी ही कहीं थम सी गई। उसके लिए अब जीवन के कोई अर्थहीन हो गई।