सुनो अपने मन की आवाज

प्रत्येक व्यक्ति में कुछ-न-कुछ प्रतिभा छिपी होती है। कुछ अच्छा गा सकते हैं, कुछ अच्छी क्रिकेट खेल सकते हैं, कुछ अच्छा भाषण दे सकते हैं, कुछ अच्छी चित्रकारी कर सकते हैं, एवं कुछ अच्छा लिख सकते हैं इत्यादि। अपनी प्रतिभा को न पहचानना हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। कुछ बच्चे अच्छा गिटार बजा सकते हैं। गिटार बजाना उसकी प्रतिभा है लेकिन बावजूद इसके उसके अभिभावक उसे किसी दूसरे क्षेत्र में ले जाना चाहते हैं। उसकी प्रतिभा प्रोत्साहन के अभाव में दम तोड़ देती है। एक अच्छा गिटार वादक किसी दूसरे क्षेत्र में चला जाता है। उसका मन गिटार में अधिक लगता है, उस विशेष क्षेत्र में जहाँ उसके अभिभावकों न उसे डाला हैं। वह उस विशेष क्षेत्र में असफल हो जाता है और उसकी प्रतिभा प्रोत्साहन के अभाव में दम तोड़ देती है। अंत में उसके अभिभावक ही उसके आलोचक बन जाते हैं। अभिभावक ईमानदारी से सोचने का प्रयास नहीं करते कि उसकी असफलता के लिए स्वयं वे ही उत्तरदायी हाते हैं। इसके विपरीत यदि वह उसे गिटार बजाने के लिए प्रोत्साहित करते तो वह अवश्य ही सफल होता।


व्यक्ति को अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसका विकास करने का प्रयास करना चाहिए। उसे अपने अपने मन की आवाज सुननी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति में एक अप्रत्यक्ष इंद्री भी होती है जिसे छठी इंद्री अर्थात सिक्स्थ सेंस ैपगजी ैमदेम भी कहते हैं। उसकी छठी इंदी जो उसे दिखाई नहीं देती लेकिन उसके भले-बुरे की सोच के लिए उत्तरदायी होती है। छठी इंद्रिय ही उसके मन की आवाज बनती है। मन की आवाज उसकी सफलता का एक संदेश होती है। सफल बनने के लिए आपको तो बस उस आवाज को सुनना है, ध्यान से सुनना है, एकाग्र होकर सुनना है। इस आवाज को सुनने में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं आना चाहिए। इसे ऐसे सुनना जैसे किसी मनपसंद संगीत को सुनते हैं। यह आवाज ही आपकी प्रेरणा बनेगी आपकी पथ-प्रदर्शक बनेगी। इससे सकारात्मक रूप में सुनो नकारात्मक रूप में मत सुनो। स्वयं में विश्वास जगाओं की आप अवश्य ही सफल होगे। आप अपने लक्ष्य को प्राप्त अवश्य ही करोगे। मत घबराओ चिंताओं से, मत पालो संकोचो को, बस डटे रहो। 
 सफलता के लिए आप सदैव, दिल की आवाज सुन कर उस पर अमल करें। एक पुरानी कहावत है कि ‘सुनो सब की करो मन की’ आप वे ही कार्य करें जिस में आपकी रुचि हो। आप दूसरे के अनुसार अपने जीवन को न जीएं। आपका मन कहता है, व्यापार करें, परंतु आप के परिवार वाले चाहते हैं, आप नौकरी करें। इस स्थिति में आपको अपनी रुचि के अनुसार व्यापार करना बेहतर रहेगा। हालांकि हो सकता है आपको व्यापार में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़े और इस स्थिति में आप गलत भी साबित हो सकते हैं, पर घबराओ मत हौसला मत तोड़ो। जैसे पूर्व में बताया गया है, असफलता से डरो मत, असफलता से घबराओ मत प्रत्येक असफलता से कुछ न कुछ अनुभव प्राप्त करो। उससे सीखो और उन कारकों को ध्यान में रखकर चलो जिनके कारण आप असफल हुए थे। उन कारकों को दूर करने का प्रयास करो। नए जोश के साथ प्रयास करो। सफलता आपको मिलेगी। असफल होने पर कुछ लोग आपको समझाने का प्रयास भी करें किµआखिकर कब तक इस कार्य में लगे रहोगे। सारी जिंदगी प्रयास ही करते रहोगे। ऐसी स्थिति में इस प्रकार की सलाह भी ठीक हो सकती है पर ऐसा सलाह देने वालो को गलत साबित करके दिखाओं।’ जिंदगी में किसी मुकाम को अंतिम मत समझो। जीवन बहुत विस्तृत है। जब तक जीयो इसका आनंद लेते रहो। मत घबराओ की असफल होगे। जीवन की नाव सफलता और असफलता रूपी किनारों के बीच झूलती रहती है। जब परिस्थितियाँ अनुकूल हो जाती है तो हम स्वयं को सफल कहने लगते है जब प्रतिकूल हो जाती है तो असफल। 
सलाह और परामर्श देने वाले बहुत होते है, प्रोत्साहन बढ़ाने वाले कम होते है। आलोचना करने के लिए बहुत से लोग खड़े हो जाते है पर प्रशंसा करके साहस बढ़ाने वाले बहुत कम होते हैं। सफल होने पर सब आपकी वाह-वाह करते है और असफल होने पर तीखी आलोचना करते हैं। इन सब बातों के बीच निर्णय आपको ही लेना होता है। आपका निर्णय ही आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। दु्रुत व सटीक निर्णय परिणाम को आपके पक्ष में करने में सहायक होगे। बिलम्ब के साथ गलत ढंग से लिए गये निर्णय ऐच्छिक परिणाम प्राप्त करने में बाधक बनते हैं। ‘लूंगा, हो जाएगा, देखूंगा, शायद ऐसा होता हैµजैसे शब्दों की अपनी शब्दावली से निकालकर सटीक निर्णय लेनी ही आदत डालो।
यह मानना ठीक है कि सलाह और परामर्श हमारी जिंदगी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है सामाजिकता के नाते लोगों से सलाह एवं परामर्श लेना ठिक रहता। आप जीवन को सलाह एवं परामर्श के आदी न बनाएं। सलाह एवं परामर्श के आदी बनने पर आप छोटी छोटी बातों के लिए औरों पर निर्भर हो जाएंगे। निर्भरता आपके आत्मविश्वास में कमी कर देगी। आत्मविश्वास में कमी आने पर भटकाव उत्पन्न होगा, भटकाव आने की स्थिति में आपकी एकाग्रता भंग हो सकती है। आप लक्ष्य से भटक सकते हो। इससे बचने के लिए आपको स्वयं अपने स्वविवेक से निर्णय लेना होगा। आपके दिल ही आवाज ही आपको बुलंदियों पर ले जाऐगी। स्वयं पर विश्वास करो की आपका निर्णय ठीक है। दूसरे पर निर्भर होने की आदत छोड़ो स्वयं की चेतन शक्ति को पहचानो। अन्य लोगों की अपेक्षा आप स्वयं ही अपने भले-बुरे का निर्णय करने में सक्षम बन सकते हो। सामने वाला आपका कितना ही हितेषी क्यों न हो आपसे बेहतर वह आपको नहीं समझ सकता। विशेष रूप से निर्णय लेने की स्थिति में आप अपने दिल की ही सुने अर्थात छठी इंद्री की ही सुनें। कई बार छठी इंद्री कुछ कहती है आप निर्णय कुछ और लेते हैं। इस स्थिति में, आपको असफल होना पड़ता है। आप छठी इंद्री ;ैपगजी ैमदेमद्ध पर ही ध्यान केंद्रित करें और उसकी सुनें कि वह आपको क्या संदेश दे रही है।
छठी इंद्री अर्थात सिक्स्थ सेंस ;ैपगजी ेमदेमद्ध अवचेतन मस्तिष्क की वह स्थिति है, जिसमें सर्वप्रथम विचार, योजना तथा सोच उत्पन्न होती है, जिनका उपयोग लक्ष्य प्राप्ति मे लिए किया जाता है। योग गुरुओं का मानना है कि ध्यान तथा प्राणायाम द्वारा छठी को इंद्री और अधिक सक्रिय किया जा सकता है। छठी इंद्री हमारी मानसिक एवं आध्यात्मिकता का अनोखा संगम है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें मनुष्य के मस्तिष्क के तार अद्भूत-रूप से उस शक्ति से जुड़ते हैं, जो समूचे ब्रह्मांड का संचालन कर रहा है। विश्व के प्रत्येक कण में वह शक्ति ऊर्जा के रूप में विध्यमान है। यह ऊर्जा मस्तिष्क में भी विराजमान है। यह मानसिक ऊर्जा ही प्रत्येक व्यक्ति को कुछ करने के लिए प्रेरित करती है। जो इस ऊर्जा का भरपूर उपयोग करता है, वह बुलंदियो पर पहुँच जाता है, जो इसका उपयोग नहीं करता वह पिछड़ जाता है। सफल होने के लिए इस मानसिक ऊर्जा का भरपूर उपयोग करो। अपनी असीम शक्ति को जानो।
सभी महान पुरुषों ने अपनी छठी इंद्रिय के माध्यम से अपनी उस असीम शक्ति को पहचान कर लगातार इसका उपयोग किया और कामयबी की बुलंदिया पाई। धीरू भाई आंबानी इस शक्ति को पहचान कर व्यापार जगत की बुलंदियों पर पहुँचे। इसी प्रकार लिंकन इस शक्ति को पहचान कर छोटे से किसान का बेटा होने के बावजूद भी अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए और चाणक्य ने नंद वंश का समूल नाश कर दिया। इस प्रकार प्रकार इतिहास में उदाहरण बहुत है। जिन्होंने सिक्स्थ सेंस का उपयोग करे कामयाबी पाई।
हम से कुछ लोगों के साथ हुआ होगा कि किसी संभावित खतरे से पूर्व भी वह सचेत हो जाते है, ऐसा क्यो होता है जो खतरे से पूर्व ही वह अपने को सचेत हो गए। उन्हें इस संभावित खतरे के प्रति सचेत किसने किया। इसमें सबसे बड़ी भूमिका छठी इंद्री की होती है। वही हमें उसे संभावित खतरे की प्रति आगह करती है। यदि आपने अपनी छठी इंद्री के संदेशों को ग्रहण करके उनका उपयोग करना प्रारंभ कर दिया तो आप अपने ‘लक्ष्य’ कुशलता के साथ प्राप्त कर सकते हैं।

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