विश्वास में छिपा सफलता का रहस्य


‘विश्वास’ स्वयं में बहुत बड़ा शब्द है। समूचा विश्व विश्वास पर ही टिका है। आज तक किसी ने भगवान को स्पष्ट रूप से नहीं देखा, बावजूद इसके दुनिया में नास्तिकों की अपेक्षा आस्तिको की सख्या कहीं अधिक है। इसका सीधा-सा कारण है, लोगों का भगवान पर ‘विश्वास’। आदिम युग लेकर आज इस अत्याधुनिक तकनीक के युग में लोगों का ‘विश्वास’ ईश्वर में बना हुआ है। चिकित्सा विज्ञान अपनी बुलंदियों पर पहुँच चुका है, बावजूद इसके आज भी बहुत से डाॅक्टर आॅपरेशन के सफल होने के बाद ‘थैंक्स गाॅड’ कहना नहीं भूलते क्योकि उन डाॅक्टरों का ईश्वर में ‘विश्वास’ है। विश्वास ही हमें ईश्वर के प्रति आस्थावान बनाता है। जिंदगी के लड़ाई में यदि कोई अकेला पड़ जाए तो उसके हृदय में एक विश्वास जागता है कि मेरे साथ यदि कोई नहीं तो क्या हुआ मेरा भगवान तो मेरे साथ है। यही विश्वास आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है। विश्व की सर्वोच्च सत्ता अर्थात ईश्वर ‘विश्वास’ पर ही अधारित है। विश्वास की शक्ति ही हमें ईश्वर से जोड़ती है। ईश्वर से साक्षात्कार कराती है। आप विश्वास करेंगे तभी ईश्वर का साक्षात्कार होगा। इस दृष्टि आप अनुमान लगा सकते हैं, ‘विश्वास’ कितना बड़ा शब्द है।


विश्वास किसी भी व्यक्ति का सबसे प्रमुख मित्र है। विश्वास व्यक्ति को आशावादी बनता है। उसके मस्तिष्क में चलने वाले नकारात्मक विचारों का दमन करता है। उसमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। स्वयं को विश्वास दिलाए आपमें सामथ्र्य है। आप लक्ष्य के प्राप्त करने में सक्षम है। मन में उठने वाले संदेह या संशय के लिए अपने मस्तिष्क के सभी दरवाजे बंद कर दें। किसी को प्रकार के नकारात्मक विचारों को स्वयं पर हावी न होने देने। स्वयं में छिपी विश्वास शक्ति के महत्व को पहचानो।
सफलता एवं असफलता का आधार केवल आपके विश्वास पर टिका है। आप में सफलता का विश्वास है, तो आप सफलता की और उन्मुख है। सफलता के प्रति संदेह होने पर सफलता के प्रति आपका विश्वास टगमगाएगा, विश्वास टगमगाने पर नकारात्मक विचार आप पर हावी होंगे। इस स्थिति में आपका एकाग्रता भंग होगी। एकग्रता के भंग होने पर आप लक्ष्य से भटक जाएगें और अंत में परिणाम असफलता के रूप में प्राप्त होगा।
विश्वास ईश्वर पदत्त एक ऐसी अमूल्य निधि है, जो केवल मनुष्य मे ही होती है। आप इस निधि से इच्छित परिणाम प्राप्त करके अपने जीवन की दिशा बदल सकते हैं। सबसे पहले आप अपने भीतर छिपी इस अनमोल निधि को पहचाननो। विश्वास की शक्ति से ही लक्ष्य या कार्य के प्रति आपमें अटूट निष्ठा बढ़ेगी। कार्य के प्रति निष्ठा ही आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगी।
‘विश्वास’ की शक्ति पहचाने, सफलता स्वयं आपको अंगीकृत करेगी। अपने ‘लक्ष्य’ को प्राप्त करने के लिए स्वयं में विश्वास जागाओ कि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हो। यह ‘विश्वास’ ही एक दिन आपकी सफलता बनेगा। जब तक आपको स्वयं की योग्यता तथा प्रयासों पर विश्वास नहीं होगा, तब तक आप किसी भी स्थिति में सफलता नहीं प्राप्त कर सकते। सफल बनने के लिए स्वयं पर ‘विश्वास’ करना ही होगा।
लगभग 40 वर्ष पूर्व एक 6 फुट 3 इंच का दुबला-पतला नवयुवक जिसकी भारी सी आवाज थी। मुंबई के फिल्म स्टूडियो में फिल्म अभिनय करने के लिए चक्कर काटा करता था। डायरेक्टर उसकी भारी आवाज तथा उसकी लंबी और दुबली कद-कठी को देखकर उसे काम देने से मना कर देते थे। एकआध फिल्मों में उसे चांस भी मिला पर उसकी कद-काठी को देखकर दर्शकों ने भी उसे ठुकरा दिया। उसकी फिल्में प्लाप हो गई। फिल्मों में सफलता न मिलने पर उसने ‘आॅल इंडिया रेडियो’ में चक्कर काटे मगर वहाँ भी उसकी भरभर और भारी आवाज ने उसका साथ नहीं दिया। यहाँ भी उसे निराशा ही हाथ लगी। बावजूद इसके उस नवयुवक को अपनी योग्यता पर पूर्ण ‘विश्वास’ था। उसे ‘विश्वास’ था, वह आवश्य सफल होगा। इसी ‘विश्वास’ ने दम पर उसे ‘जंजीर’ जैसी फिल्म मिली और यहीं से प्रारंभ हुई हिंदी सिनेमा महानायक की सफलता की कहानी। उसके इसी ‘विश्वास’ के कारण टिकट खिड़की ;ठवग व्ििपबमद्ध पर कोहराम मच जाता था। वह नवयुवक कोई और नहीं हिंदी सिनेमा का महानायक अमिताभ बच्चन था। आज प्रत्येक अभिनेता का सपना होता है, वह अमिताभजी जितनी सफलता अर्जित करें। वह सदी के महानायक बन गये। आज लोग उन्हें हिंदी सिनेमा के शहंशाह मनाते हैं। वह भारतीय सिनेमा के शहंशाह ही नहीं बे-ताज बादशाह है। जिसकी सफलता के ताज को हर अभिनेता पहनना चाहता है।
महात्मा गांधीजी को भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति का पूर्ण ‘विश्वास’ था। इस ‘विश्वास’ को उन्होंने करोड़ों भारतीयों के हृदय में जगाया। उस ‘विश्वास’ ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा दी। उस ‘विश्वास’ के बल पर ही महात्मा गांधी ने ‘सत्य’ और अंहिसा के सहारे ही अंग्रेजी शासन को भारत से खदेड़ दिया। गांधीजी का ‘विश्वास’ प्रत्येक भारतीय के हृदय में बसता था। गांधी जी ने सही अर्थों में ‘विश्वास’ की शक्ति पहचानकर उसका उपयोग किया। नहीं तो कौन कह सकता था एक दुबला-पतला इंसान इतने बड़े ब्रिटिश साम्राज्य पर जिसमंे कभी सूरज अस्त नहीं होता था, भारी पड़ेगा।
 विश्वास धीरुभाई अंबानी ने जगाया अपनी निवेशकों, अपने ग्राहको, अपने कर्मियों तथा अपनी सहयोगियों में। इसी विश्वास के कारण धीरु भाई अंबानी का ‘रिलायंस समूह’ विश्व के जान माने व्यापारिक समूहों में सम्मिलित हो गया। उनका ‘विश्वास’ ही उनकी कामयाबी का मूल मंत्र बना। विश्वास के कारण ही वह एक अध्यापक के पुत्र से भारतीय व्यापार जगत की सर्वोच्च हस्ती बन गए थे। सोचो यदि धीरुभाई अंबानी अपने विश्वास को कायम न रखते तो क्या कभी इतनी उन्नति कर पाते। इसलिए ‘विश्वास’ जगाओ।
सफलता के लिए आपको स्वयं में विश्वास जागना होगा अर्थात आपको स्वयं में आत्मविश्वास पैदा करना होगा। आत्मविश्वास के अभाव में आप कभी सफल नहीं हो सकते। अपनी योग्यताओं तथा क्षमताओं के प्रति आशान्वित बनो। आत्म-विश्वास की उपयोगिता के विषय में स्वामी विवेकानंद ने कहा हैµ”नास्तिक वो नहीं तो ईश्वर पर विश्वास नहीं करता, अपितु नास्तिष्क वो है जो स्वयं पर विश्वास नहीं करता।“ आप चाहे कितने आस्तिष्क है, यदि आप में आत्मविश्वास का अभाव है, तो आप आस्तिष्क होने पर भी नास्तिष्क ही हो। इस दृष्टि से आत्मविश्वास एक उपासना है, अपने आराध्य को पाने के लिए। जिस प्रकार से आप अपने अराध्य के प्रति समर्पित होकर उसे भजते है उसी प्रकार सफलता के लिए आप ‘लक्ष्य’ को प्राप्ति की कामना करें। इससे चित्त बसा लें, देखना वे स्वयं आपके पास आ जाएगा।
लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वयं में ‘विश्वास’ जगाने के लिए आपको अपने अवचेतन मस्तिष्क को संदेश देना होगा कि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यह एक ऐसा संदेश है जो आपके अवचेतन मस्तिष्क में फिट हो जाएगा, जिससे आपमें विश्वास जागृत होगा कि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में समर्थ हैं। ‘विश्वास’ आपको लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रेरित करेगा। ‘लक्ष्य’ प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम विश्वास जागना परम आवश्यक है।
कुछ भाग्यवादी लोग अपनी असफलता को अपना भाग्य मान लेते हैं। वे अपने को दुभाग्यशाली मान बैठते हैं। यह संदेश उनके अवचेतन मस्तिष्क में जा बैठता है। इस स्थिति में उनके अवचेतन मस्तिष्क में नकारात्मक विश्वास पैदा होता है। यह नकारात्मक विश्वास ही उनकी असफलता की जड़ बन जाता है। इसके विपरीत वह विश्वास जगाये कि इस बार वह असफल हुए तो क्या हुआ अगले बार फिर प्रयास करेगा और सफलता उसे आवश्य ही मिलेगी। इस स्थिति में आपमें मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा पैदा होगी। यह सकरात्मक सोच ही आपका ‘विश्वास’ बनेगी। यह विश्वास ही आपकी सफलता की शक्ति बनेगा। स्वयं विश्वास जागृत करने के लिए आपको आत्म-चिंतन करना पड़ेगा। आपको स्वयं को समझाना होगा कि आप अपना लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम है। आपमें सामथ्र्य है, आपमें योग्यता है, आपको असफलताओं से घबराना नहीं है, आपको उसका सामना करना है।
सफलता का प्रारंभ ही विश्वास से होगा। विश्वास जागने पर ही सफलता अर्जित की जा सकती है। विश्व मंे जितने भी आविष्कार या खोजे हुई, उनके पीछे प्रमुख कारण था ‘विश्वास’। उनके अविष्कारकों को ‘विश्वास’ था ऐसा होना संभव है। मारकोनी को विश्वास था कि हवा में एक स्थान से संदेश को भेजकर अन्य स्थान पर सुना जाना संभव है। उनके इसी विश्वास से रेडियो का अविष्कार हो सका। राईट बंधुओं को विश्वास था, हवा में किसी यंत्र का उड़ पाना संभव है। उनके इसी विश्वास से हवाई जहाज का आविष्कार हुआ। ऐसे अनेक उदाहरण हमारे समक्ष उपलब्ध है, जहाँ विश्वास के कारण ही आविष्कार या खोज संभव हो सकी। सफलता से पाने का सबसे अचूक शस्त्र ‘विश्वास’ ही है।
सफलता रूपी पेड़ का मूल विश्वास मंे छिपा होता है। विश्वास की एक रूप है आत्म-विश्वास अर्थात स्वयं पर विश्वास करना। आप विश्वास करो की आप में असीम शक्ति एवं क्षमता है। आवश्यकता है उसे पहचाने की इस ब्रह्मांड के सभी प्राणियों में मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसमें असीम क्षमता है। अपनी इसी असीम क्षमता को पहचानकर ही मनुष्य आदिमानव से वर्तमान उच्च तकनीक से सम्पन्न मानव सभ्यता को स्थापित कर पाया। यदि मानव जाति अपनी इस असीम क्षमता को न पहचानती तो फिर वह आदिम मानव ही होती। इसलिए आप भी अपनी अदम्य क्षमता का पहचानें, स्वयं में विश्वास को जगाएं। अपने को पहचानें कुएं का मेढक बनने की अपेक्षा विस्तृत संभावनाएँ तलाशने का प्रयास करें। ‘मैं जैसा हूँ बस ठीक हूँ।’ इस ‘बस ठीक हूँ’ वाली नियति को बदल कर मैं इसे भी अच्छा बन सकता हूँ, मुझ में क्षमता है, इस प्रकार की मानसिकता को अंगीकृत करें। नियति के गुलाम न बनकर संभावनाओं के स्वामी बनों। स्वयं को पहचानों दोस्तो! अपने भीतर छुपे आत्म विश्वास को जागओ।
प्रतिभा प्रत्येक व्यक्ति मे होती है, बस आवश्यकता होती है उसे पहचानने की। बिना विश्वास के आप अपने अंदर छिपी प्रतिभा को नहीं पहचान सकते। आप में प्रतिभा होने के बावजूद आप पिछड़े हुए क्यों हैं कभी अपने सोचने का प्रयास किया, जी नहीं? नहीं, तो क्यों नहीं? क्योंकि आपमें विश्वास की कमी है। आपको डर है कहीं आपने इस प्रतिभा को लोगों के समक्ष रखा तो लोग आप का मखौल बनाएंगे आपकी ऐसी सोच ही तो आपके विश्वास को कम करती है। आपने कभी जानने का प्रयास नहीं किया कि आपसे कम प्रतिभावान व्यक्ति आपसे अधिक उन्नति कर गए। आखिर क्यों? ऐसे स्थिति में आप स्वयं में और उनमें तुलना करें। फिर सोचे की उनमें ऐसा क्या है जो आप में नहीं। आप प्रत्येक के साथ घुलमिल जाते हैं सबसे सामंजस्य बैठा लेते हैं। नहीं ता फिर आप में झिझक है, आप सोचते हैं सामने वाला आपके विषय में क्या सोचेगा। पहले वह ही आपसे आकर बोले। फिर आप उससे बोलेंगे। ऐसे में न तो वह आपसे बोलेगा और न ही आप उससे। आप ऐसे व्यक्ति की मित्रता को खो देते हैं जो कभी निकट भविष्य में संभवत आपके कुछ काम आ सकता था।
सफलता के लिए आपको अपनी झेंप को मिटाना होगा। अपनी राय बे-बाक ढंग से समूह के समक्ष रखने का प्रयास करना होगा। अधिकतर व्यक्ति अपनी झेंप को अपना स्वभाव मान लेते है। हालांकि झेंपू एवं दब्बूपन आपके स्वभाव से ही जुड़े हुए हैं। सफलता प्राप्त करने के लिए इन्हें दूर करना पडे़गा। झेंप और दब्बूपन आपकी सफलता मे बहुत बड़ी रुकावट बनते हैं। स्वयं की क्षमता को पहचानकर आत्मविश्वास पैदा करने का प्रयास करें।
कार्य का प्रारंभ करने से पहले उसके प्रति पूरी तरह आशावान बने कि आपमें इतनी क्षमता और योग्यता है कि आप इस कार्य का निष्पादन करके रहेंगे। यही आप का आत्मविश्वास है। आत्म विश्वास न होने पर आपके मस्तिष्क में सदैव शंका बनी रहेगी। यह शंका ही आपकी सफलता के मार्ग मंे एक बड़ी बाधा है। इस शंका को आज से, आज से क्या अभी से दूर कर दो। देखना सफलता आपके कदम अवश्य ही चूमेगी।
आत्मविश्वास पूर्ण व्यक्ति अपने कार्य को पूरी निपुणता एवं कुशलता के साथ करता है। जिसका स्वयं को प्रस्तुत करके का ढंग आकर्षक होता है। उसके मस्तिष्क में शंका नाम की कोई चीज नहीं होती। आत्मविश्वास आपके व्यक्तित्व को सबसे महत्वूपर्ण पहलू है। आपने आत्मविश्वास के विकास कर लिया तो आपने अपने व्यक्तित्व का विकास कर लिया।
कुछ विद्यार्थी पढ़ाई में तेज होने पर भी अच्छे अंक नहीं प्राप्त कर पाते इसकी एक वजह उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है। वे परीक्षा भवन में जाकर अपने आत्मविश्वास को खो बैठते हैं सही उत्तर आने पर भी उसे गलत लिखते हैं या लिखते ही नहीं। इस कारण उनके अंक कट जाते हैं। परीक्षा में सफल होने के लिए विद्यार्थी में आत्मविश्वास का होना अति आवश्यक है। आप स्वयं को भरोसा दिलाओं कि आप अच्छा परिणाम प्राप्त करने में सक्षम हैं। अभिभावकों का कत्र्तव्य है कि वे बच्चे के आत्मविश्वास में वृद्धि का प्रयास करें। उन्हें प्रेरित करें, आपमें क्षमता है, आप अच्छा कर सकते हो, इससे विद्यार्थी का आत्मविश्वास का स्तर अवश्य बढे़गा।
इसके विपरीत अक्सर देखा जाता है अभिभावक अपने बच्चे की अन्य बच्चे से तुलना करके उसे नालायक, बुद्धू, भौंदू, अनपढ़, तथा फेलियर जैसे शब्दों से संबोधित करते हैं। इस प्रकार के संबोधन बच्चे आत्मविश्वास को चोट पहुँचाते हैं। 
बच्चे मंे आत्मविश्वास के बीज बचपन से ही डाले जाने चाहिए। उसे उसके अभिभावक समय-समय पर प्रेरित करंे कि ‘आप अच्छा कर सकते हैं’, ‘आपमें क्षमता है’। इस तरह के सकारात्मक शब्द बच्चे के व्यक्तित्व एवं बौद्धिक विकास में अवश्य सहायक बनेंगे। बच्चे में बचपन से आत्मविश्वास के बीज डालने पर बड़े होने तक वह उसमें एक अच्छे पेड़ का रूप ले लेगा। यह आत्मविश्वास का पेड़ ही उसके जीवन में सफलता प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।
आत्मविश्वास मे वृद्धि के लिए निम्न बातों पर अमल कर सकते हैंµ
– सर्वप्रथम आत्म विश्वास में वृद्धि करने के लिए एक निश्चित निर्णय लें।
– आप किन परिस्थितियों में अपना आत्मविश्वास खोते है उनका आंकलन करें ओर उन्हें दूर करने का प्रयास करें।
– आप लोगों के साथ निगाह मिलाकर बात करते हुए अपने आत्मविश्वास को दिखाने का प्रयास करें।
– स्वयं को क्षमताओं को पहचाने कर भरोसा दिलाये की आप कर सकते हैं।
– अपने अनुकूल बातें एवं विचारों को लाने का प्रयास करें।
– नए समूह में घुले-मिलने का प्रयास करें।
– नियमित रूप से आधा घंटा अपने ‘लक्ष्य’ के विषय में सोचें। स्वयं को विश्वास दिलाये की असंभव जैसी कोई चीज नहीं। आप इस ‘लक्ष्य’ भेद सकते है।

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