अनमोल सुक्तिकोश-9

यदि सचमुच ही तुम दुःख से डरते हो और तुम्हें दुःख प्रिय है, तो फिर प्रकट या गुप्त रूप से पापकर्म मत करो।
-उदान
पात्रा की योग्यता देखकर व्यवहार करो।
-चाणक्य
जिनके हृदय में सदैव परोपकार की भावना रहती है, उनकी आपदाएं समाप्त हो जाती है और पग-पग पर धन की प्राप्ति होती है।
-चाणक्य

प्रकाश में हर आदमी भला लगता है, पर अहंकार में नहीं?
-जार्ज बर्नार्ड शाॅ
पापी के समान मूर्ख नहीं, जो प्रत्ये क्षण अपनी आत्मा को दांव पर लगाता रहता है।
-टिलसन
समय का पाबंद सफल व्यापारी है।
-डेल कारनेगी
अच्छी पुस्तक वह है, जो आशा से खोली जाए और लाभ से बद की जाए।
-ऐग्रो ब्रांसन अलकाट
पीड़ा से ही कविता उपजती है
-वाल्मीकि
पुरुष का जीवन संघर्ष से आरंभ होता है और स्त्राी का आत्मसमर्पण से
-महादेवी वर्मा
उत्तम पुरुषों की यह रीति है, कि वे किसी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ते।
-वीलैंड
पुरुषार्थी की बांहो में ही लक्ष्मी समाती है।
-सुभाषित
यदि यूरोप के सब ताज इस शर्त पर मुझे पेश किए जाए कि मैं पुस्तकें पढ़ना छोड़ दूंगा तो मै उन ताजों को ठुकरा कर दूर फेंद दूंगा ओर पुस्तकों की तरफदारी करूंगा।
-फ्रैंकलिन
मैंने उससे पूछा तुम्हारी पूंजी क्या है, तो उसने अपने दोनों हाथ ऊपर कर दिए।
-टालस्टाय
कर्म से बढ़कर पूंजी दूसरी नहीं है।
-चाणक्य
जो दूसरा ेंको कठिन लगे, उसे सरलता से करने में कौशल है, कौशल के लिए जो असंभव है, उसे कर दिखाने में प्रतिभा है।
-ऐमियन
प्रतिभावना वह है, जिसमे समझदारी व कार्य शक्ति विशेष हो
-शाॅपनेहावन 
उन्हें स्वामिभक्त न समझ जो तेरी हर कािनीव करनीकीप्रशंसा करें। अपितु उन्हें स्वाभिक्त समझ तो तेरे दोशों की मृदुल आलोचना करें।
-सुकरात
किसी के गुणां की प्रशंसा करनेमे ंअपना समय मत खोओ, उसके गुणां को अपनाने का प्रयास करो।
-कार्ल माक्र्स
किसी को अपनी प्रशंसा करने के लिए विवश कर देने का केवल एकही उपाय है कि आप सत्कर्म करें।
-वाल्टेयर

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