अनमोल सुक्तिकोश-10

जो मनुष्य अपना भेद अपने सेवक को बताता है, वह सेवक को अपना स्वामी बना लेता हैं
-जान ड्राइडेन
जो तुम्हारे लिए बबूल बोए, उसके लिए फूल बोओ।
-रहीम
जो प्रेम से नहीं सुधर सकता, वह कभी नहीं सुधर सकता।
-सुकरात


प्रिय समय की भावना का नाम है। समय पर जो प्रिय लगता है, समय बीतने पर वही अप्रिय लगता हे।
-फ्रायड
अपनी प्रशंसा सुनकर प्रसन्न मत हो।
-विदुर
वह भेद जो तुम गुप्त रखना चाहते हो, किसी से न करो, तो उसने आधा भेद तो खोल दिया, बाकी आधा वह कब तक सुरक्षित रह पाएगा।
-चाणक्य
बात से ही पता लगता है कि बात करनेवाला कैसा है? बात चरित्रा ओर स्वभाव का दर्पण है
-फ्रायड
मैं दुनिया में बुरा खोजने निकला, पर जब अपने हृदय में झांक कर देखा तो मुझसे बुरा कोई नहीं है।
-कबीर
सभ्यता की भाषा में एक खास दिक्कत यह है कि सब जगह ओर सब तरह के लोग उसे समझ नहीं पाते और असभ्यता की भाषा की यह शान कि उससे सब जानते हैं।
-रवींद्रनाथ ठाकुर
मैंने जो दिया वह मेरे पास है, मैंने जो खर्च किया वह मेरे पास था, किंतु मैंने जो बटोरा वह गंवा दिया।
-कहावत
जितना अधिक आप अपने बारे मे बोलेंगे, उतना ही अधिक आपके मुँह से झूठ निकलने की आशंका है।
-जिमर मैन
परिस्थितियां किसी व्यक्ति को मजबूत या कमजोर नहीं बनाती, किंतुि वे यह देखाती है कि वह व्यक्ति है क्या।
-टामस ए. केंप
मितव्ययिता के बीज से स्वतंत्राता की सफल उगती है एक सुनहरी फसल।
-आगेसिलाँस।
हे प्रभु! मुझे तू जंगली पशुओं ने आततायी से और पालतु जानवों में चापसूस से बचा।
-बेन जांनसन
जो दूर धुंधल में छिपा है उसकी क्या चिंता, सामने को खुली राह पर पाँ बढ़ाओ।
-कारलाईज



प्रमदित ओर सहृदय बने रहने का कर्तव्य पूरा नहीं हुआ तो कर्तव्य पालन का सुख कहां मिलेेगा।
-चाल्र्स बैक्सटन
ईश्वर को पिता के रूप में स्वीकार किए बिना मनुष्यों में बंधुत्व संभव नहीं।
-एच.एम.फोल्ड
जीवन उनके लिए दुःखमय है जो महसूस करते हैं ओर उनके लिए सुखमय है जो चिंतन करते है।
-ला ब्लायर
धृणा हृदय का उन्माद है।
-बायरन
जिसके मन में अपराध की भावना है वह निंरत यही सोचता है कि लोगों  की निगाह मेरे पाप पर है।
-शेक्सपियर

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