अनमोल सुक्तियां -4

जो तुम्हारे विरुद्ध है, उसे तुम अपना पथ प्रदर्शक मानो।
-सुकरात
विनाश काल में बुद्धि विपरीत हो जाती है।
-सुभाषित
विद्वान कभी अशब्द का प्रयोग नहीं करते।
-वुड



सुंदर चेहरा देखकर विद्वता भैंस चराने चली जाती है।
-भृतहरि
मनुष्य विकारों का पुतला है।
-चाणक्य
सत्य कडुवा होता है।
आप पर आपत्ति, दुख और चिंताएं इसलिए आती है कि आप भीतर से बैकुंठ का अनुभव करें।
-स्वामी रामतीर्थ
विपत्तियां कभी अकेली नहीं आतीं।
-स्वामी रामतीर्थ
संयम सुख का साधन है। संयमी सच्चा तपस्वी होता है
-विवेकानंद
संतोष सुख की नींद प्रदान करता है
-कार्लाइल
संगति ही मनुष्य का रूप बनाती है।
-चाणक्य
शांति सबसे बड़ा धन है
-जवाहरलाल नेहरू
शैतान बाहर नहीं। देखों तुम्हाने मन केकोने में छिपा है।
-सुकरात
विपत्तिया कभी अकेली नहीं आती।
-स्वामी रामतीर्थ

अपने से अधिक शक्तिशाली से वैर करना परिणाम में दुखद होता है।
-भारवि
कायर मृत्यु से पूर्व अनेक बार मरते हैं किंतु वीर एक ही बार मरते हैं।
-शैक्सपियर
वीर पुरुष अपने पौरुष के भरोसे युद्ध करता है, सैनिकों की संख्या के बल पर नहीं।

व्यभिचारी को इन चार चीजों से मुक्ति नहीं मिलती-धृणा, पाप, भय और कलंक
-तिरुवल्लुर
छोटों के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन मत करो
-चाणक्य
शब्द अस्त्र-शस्त्र से अधिक घात है।
-वाणासुर
मनुष्य का सबसे बड़ा शस्त्राु उसकी इंद्रिया हैं।
-भृर्तहरि

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