कल्पना के पंखों से भरे सफलता की उड़ान

शाब्दिक दृष्टि से कल्पना और यथार्थ दो विपरीतार्थक शब्द है। जहां कल्पना के पंख होते है, वहीं यथार्थ का स्थिर आधार होता है। कल्पना चंचल और उन्मुक्त होती है तो यथार्थ धीर-गंभीर होता है। बावजूद इसके ‘सफलता’ की दृष्टि से दोनों शब्दों के बीच घनिष्ठ संबंध होता है। कल्पना ही यथार्थ का आधार बनती है। ‘यथार्थ’ का उद्भव कल्पना से ही होता है। कल्पना ही यथार्थ की जननी होती है। इसे एक उदाहरण के द्वारा ऐसी भी समझता जा सकता है। किसी चित्रकार की चित्रकारी या मूर्तिकार की मूर्ति यथार्थ रूप लेने से पूर्व एक कल्पना ही होती है। यहाँ एक बात समझ लेना आवश्यक है कि कल्पना को यथार्थ में बदलने के लिए विश्वास के साथ परिश्रम करना पड़ता है। विश्वास हो कि जो कल्पना आपने की है उसे आप यथार्थ रूप देने में समर्थ हैं।


सपने भी कल्पना का एक रूप होते है। आपके सपने ही आपकी सफलता की सीढ़ी बनते है। सफलता के लिए कभी सपने देखना मत छोड़ो, साथ ही उन्हें पूरा करने का भी भरसक प्रयास करो। भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मनाना है किµसपने लेना मत छोड़िए, लेते रहिए, सपने आधारशिला होते है नए भवन के निर्माण की।’ डॉ. कलाम की ऐसी सोच ने ही महानतम् बना दिया। सफलता के लिए आपको कलाम की उक्ति को अपने जीवन में अंगीकृत करना होगा। सफलता के लिए सपने देखों मगरएवं ख्याली पुलाव कभी भी मत बनाओ। ख्याली पुलाव सफलता का मजबूत आधार नहीं बन सकते। उन्हें हकीकत की जमीन पर उतारने का प्रयास करें। 
महान व्यापारी, संगीतकार, साहित्यकार, वैज्ञानिक इत्यादि ने अपनी कल्पना शक्ति का प्रयोग करके सर्वप्रथम सपने संजोए। उनके मस्तिष्क में सर्वप्रथम एक सोच या विचार ;प्कमंद्ध उत्पन्न हुआ। उन्होंने उस सोच या विचार को यथार्थ में बदलने के लिए विश्वास के साथ परिश्रम किया। उसके लिए निर्धारित योजना बनाई। योजना भी उनकी कल्पनाशक्ति से ही उत्पन्न हुई। उन्होंने उस योजना पर परिश्रम के साथ अमल किया। अंत में परिणाम उन्हें सफलता के रूप में प्राप्त हुआ।
सफलता प्राप्त करने के लिए अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करें, जिससे मस्तिष्क में नित्य नई सोच या विचार उत्पन्न हो सके। आपकी नई सोच और नए विचार ही आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करेंगे। मस्तिष्क को कल्पना के लिए खोल दो। उसे नए सोच एवं विचारों के अथाह प्रवाह को आने दो उसे मत रोको। अक्सर देखा जाता है कि कोई दो या तीन साल का बच्चा कागज पर पेंसिल या पैंन से कुछ उकेरने का प्रयास करता है। माँ उसे डांट कर उससे पेन या पेंसिल छीन लेनी है। उन्हें यह नहीं मालूम होता है वह उसके माध्यम से अपने कल्पना को पहचान दिलाना चाहता है। जैसे-जैसे बालक सियाना या बड़ा होता है, वही पेंसिल या पेन से कागज पर कुछ न कुछ उकेरने की आदत उसे पहचान दिलाना शुरू कर देती है। ये आकृतियाँ एक दिन शब्दों या चित्रों का रूप ले लेने लगती हैं।
आप अक्सर किसी सुंदर भवन को देखते है। आखिर भवन इतना सुंदर और बेजोड़ कैसे बना। इसके पीछे आखिर कौन-सी शक्ति है, जिसने इसे इतना सुंदर बना दिया? इसके पीछे छिपे कारण को आपने जानने का प्रयास किया। इसके पीछे सबसे प्रमुख कारण है उस वास्तुकार की कल्पना शक्ति जिसका प्रयोग करके उसने इसका प्रारूप तैयार किया। हालांकि उस भवन को मूर्त रूप देने में इंजीनियरों एवं कारीगरो के श्रम के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। जिन्होंने वस्तुकार की ‘कल्पना’ को यथार्थ रूप दिया। आपको भी जीवन रूपी भवन को सफल और सुंदर बनाने के लिए सर्वप्रथम एक अच्छा प्रारूप तैयार करना पड़ेगा अर्थात अपना लक्ष्य-निर्धारित करना पड़ेगा। फिर उस प्रारूप को मूर्त रूप देने के लिए इंजीनियरों एवं कारीगरों की तरह कठिन परिश्रम करना होगा।
निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वयं मोटिवेट करने के उद्देश्य से आप कल्पना करें कि लक्ष्य प्राप्त करने के पाश्चात आपकी स्थिति कैसी होगी। कल्पना शक्ति का उपयोग करके लक्ष्य प्राप्ति को दृश्याकिंत ;टपेनंसपेमद्ध कीजिए। जितना आप दृश्याकिंत करेंगे, उतना ही आपका लक्ष्य स्पष्ट होता जाएगा। सफलता की दृष्टि से लक्ष्य कभी धुंधला नहीं होना चाहिए, ‘लक्ष्य’ जितना स्पष्ट होगा, उतना ही उसके प्रति आप समर्पित होंगे। आप में उसे पाने के लिए विश्वास जागेगा। विश्वास आपको प्रेरित करेगा, आप परिश्रम के साथ प्रयास करेंगे। परिश्रम के साथ प्रयास करने से ही अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे।
मनुष्य की कल्पना शक्ति उसके अवचेतन मस्तिक से संवाद करने की शक्ति है। सभी प्रकार के सृजनात्मक विचारों का जन्म इस शक्ति के माध्यम से ही होता है। आप इस शक्ति को पहचानकर इससे जुड़ने का प्रयास करें। कल्पनाशक्ति के द्वारा ही आपका लक्ष्य आपके अवचेतन मस्तिष्क में स्थिर रह सकता है। सफल व्यक्ति की सफलता के पीछे उसकी कल्पना शक्ति ही होती है, वे कभी असफलता के विचारों को हावी नहीं होने देते। कल्पना को यथार्थ रूप में परिवर्तित करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते है। अंत में उन्हें सफलता मिलकर ही रहती है। अब तक हुए सभी आविष्कारों एवं खोजों के पीछे इन्हें करने वालो की कल्पना शक्ति ही थी। कोई नहीं कह सकता था कि कहीं दूर बैठे अन्य व्यक्ति से वार्तालाप संभव हो सकेगा। यह तो बस आविष्कारकर्ता की कल्पना ही थी। उसकी ‘कल्पना’ के प्रति उसके विश्वास से ऐसा संभव हो सका। आज टेलीफोन एक आम उपकरण बन गया है। इसी प्रकार अन्य आविष्कार और खोजों के विषय में ‘कल्पना’ ही थी।
यह एक विडम्बना ही है कि वर्तमान अपाधापी भरी जीवन-शैली में सपने तो प्रत्येक देखता है, उन्हें पाने का प्रयास कोई नहीं करता। पद, पैसा और प्रतिष्ठा चाहने वाले सब हैं। पर परिश्रम के साथ प्रयास करके उसे पाने वाले बहुत कम हैं। मात्र सपने देखकर सोचने से ‘सफलता’ की सीढ़िया नहीं चढ़ी जा सकती। मात्र सपने देखकर मानसिक संतुष्टि पाने का प्रयास मत करो। मानसिक संतुष्टि क्षणिक होती है। एक क्षणिक आनंद प्रदान करती है। परंतु इसका परिणाम कुछ नहीं निकलता। सपने सदैव पूरा करने के लिए देखो। मानसिक संतुष्टि के लिए सपने देखने या कल्पना करने की आदत एक दिन मानसिक तनाव भी उत्पन्न कर सकती है। जो पाना चाहते हो उसे दृढ़निश्चय के साथ पाने की दृढ़इच्छा करो।
लक्ष्य प्राप्ति की कल्पना करें। उसकी असफलता के विषय में बिल्कुल न सोचें। असफलता के विषय में सोचने पर असफलता ही हाथ आएगी। असफलता की कल्पना आपको अक्षम तथा दुर्बल बना देगी। अक्षमता और दुर्बलता से आप जीवन में किसी भी सफलता की लड़ाई को नहीं जीत सकते। इसे जीतने के लिए तो कल्पना के पंख लगाकर उड़ना होगा।

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