निर्णय लेना सीखें

सफलता एवं निर्णय के बीच निकट का रिश्ता है। आपका निर्णय ही आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। अधिकतर लोगों के असफल होने का सबसे बड़ा होता है उनका ठीक समय पर ठीक निर्णय न ले पाना। ‘निर्णय’ को निरंतर टालते रहना अपने में सफलता के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा बनता है। ठीक समय पर लिया गया निर्णय ही आपको मंजिल तक पहुँचाएगा। 


हमारी शिक्षा प्राणाली की सबसे बड़ी खामी यही है कि इसके अंतर्गत  विद्यार्थियों में निर्णय लेने की क्षमता का विकास नहीं कराया जाता। हालांकि प्रबंध की पुस्तकों में संगठन के स्तर पर तो निर्णय लेने की प्रक्रिया का वर्णन किया जाता है परंतु व्यक्तिगत स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता का वर्णन नहीं किया जाता। जबकि सफलता की दृष्टि से ‘निर्णय-लेना’ सर्वाधिक आवश्यक होता है। अपनी शिक्षा के दौरान विद्यार्थी निर्णय ही ले पाते कि उन्हें शिक्षा के पश्चात करना क्या है? जो निर्णय ले लेते है, वह सफल हो जाते है, तो नहीं ले पाते वह भटकते रहते हैं।
अपने निर्णय कल पर टालने वालों का सफल होना संदिग्ध होता है। यह एक कटु सत्य है। कल कभी नहीं आता। आने वाला कल, अगले दिन के लिए ‘आज’ बन जाएगा और आज के बाद फिर बात कल पर टाल दी जाएगी। निर्णय के महत्व को ही ध्यान में रखते हुए कबीर दास ने लिखा हैµ
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल के परलय होएगी, बहुरी करेगो कब ड्ड
आपको जो आज करना है उसे आज ही करें। उसे कभी भी कल के लिए न छोड़े क्योंकि कल कभी किसी ने नहीं देखा होता है। 
आपका निर्णय ही आपका भाग्य बदलता है। आपमें से अधिकतर दूसरें के सलाह एवं सुझावों पर चलते हैं। इस दुनिया में सलाह और सुझाव निःशुल्क मिलते हैं। जितने लोगों से मिलोगे उतनी ही आपको सलाह मिलेगी। अत्याधिक सलाह एवं सुझाव आपको आपके लक्ष्य से दिग्भ्रमित कर सकते हैं। अन्य की सलाह एवं सुझाव के आधार पर ‘निर्णय’ लेने वालों की सफलता की संभावना कम ही रहती है। आप दूसरों की सलाह को महत्व दे पर सोच-समझकर ही अमल में लायें। आपके पास सोचने विचारने की शक्ति है आप उसका उपयोग करें, अपने फैसले स्वयं लें। यदि अपने निर्णय लेने में किसी प्रकार की सूचना या तथ्य की आवश्यकता हो तो उस पर अवश्य ही दूसरे से चर्चा करें। आपको अपने फैसले ‘स्वयं’ ही लेने होंगे। दूसरा क्या कहता है इस पर ध्यान न दें। अपने निर्णय पर ही ‘अटल’ रहे। आपका निर्णय ही आपका भाग्य बदल सकता है। ये मत सोचो कि यदि की आप असफल हो गए तो दूसरा व्यक्ति क्या कहेगा। ये कि सोचो आपकी सफलता ही फलां व्यक्ति द्वारा आपकी आलोचना का सटीक उत्तर होगा। आपके सफल बनने के लिए जिद्दी बनना पड़ेगा। यहाँ जिद्द कर अर्थ उदंडता के रूप में नहीं लेना चाहिए। जिद्द का अर्थ है अपने ‘निर्णय’ पर अड़े रहना। जो ठान लिया उससे करके दिखाना। वास्तविक रूप में आज हम जिस आधुनिक तथा उच्चतम तकनीक युक्त जीवन-शैली में जी रहे है। यह जीवन-शैली मनुष्य के जिद्दी होने के परिणामस्वरूप ही प्राप्त हो सकी है।
सभ्यता के प्रारंभ में पृथ्वी का वातावरण रहने लायक नहीं था। मनुष्य ‘आदिम मानव’ के रूप में घुमंतु जीवन जीता था। मनुष्य ने सभ्य बनने की जिद्द की उसी जिद का परिणाम है। आज मनुष्य पूर्णत आधुनिक तथा उच्चतकनीक से युक्त जीवन-शैली को अपना रहा है। मनुष्य ने जिद्द करके अपनी जीवन-शैली को बदला। उसने बदलाव का ‘निर्णय’ लिया। आप भी अपने जीवन में ‘बदलाव’ का निर्णय लें। यदि आप गरीबी की जिंदगी जी रहे हैं तो इसे बदलने का निर्णय आपको ही करना होगा। इसे दूर करने का प्रयास आज ही से शुरू करें। यदि आप योग्य होने के बावजूद किसी मुकाम पर नहीं पहुँच पा रहे तो उस ‘मुकाम’ को पाने का निर्णय आज ही करें। दुनिया को दिखा दो आपमें योग्यता है। ‘दब्बू’ मत बनो ‘दबंग’ बनो अपनी योग्यता को सबके सामने लाओ। यह कैसे होगा इसका निर्णय आप को करना है। अपना ‘लक्ष्य’ बनाओ, उसे प्राप्त करने की दृढ़ इच्छा जगाएं। ‘इच्छाओं’ की पूर्ति के लिए योजनाएँ बनाएं उन योजनाओं पर अमल करें। फिर देखो कैसे आपको दुनिया बदलती है। बस, सर्वप्रथम आपको कुछ करने का निर्णय लेना होगा।
ऐसे लोगों को अपना मित्र बनाओ जो आपकी आपके निर्णय में सहायता करें। आपको प्रोत्साहित करे। समय-समय पर आपको प्रेरित करें। आपसे स्नेह एवं सहानुभूति हो। ऐसे लोगों से दूर रहो जो आपको हतोत्साहित करते हों आपकी आलोचना करते हो। बात-बात पर आपकी आलोचना करने वालों से दूर रहो। ऐसा व्यक्ति कभी आपके सहायक नहीं बन सकता जो आपकी आपके निर्णय में आलोचना करते हो। आपका हौसला प्रस्त करते हो।
कम बोलो और अधिक सुनो। वाचाल बनने की स्थिति में आप अधिक बोलते हैं और सुनते बहुत कम है। इस स्थिति में आप अपनी योजनाओं और उद्देश्यों अन्य के समक्ष खोल देते है। ऐसी स्थिति में अन्य व्यक्ति आपकी योजनाओं पर अमल करके उससे लाभ उठा सकता है। अन्य लोगों से बातें करते समय जहाँ तक हो सके अपने आँखों और कानों को खोलकर रखें तथा मुँह का बंद रखें। मुँह खोलने की स्थिति में आप समक्ष उपस्थित व्यक्ति के ज्ञान एवं जानकारियों से भी वंचित रह जाते हैं। सफल बनने के लिए आपको स्वयं के ज्ञान के अतिरिक्त अन्य लोगों के ज्ञान एवं जानकारियों की भी आवश्यकता होती है।
 एक अच्छी खासी सरकारी नौकर छोड़ कर दलितों को एकजुट करने का निर्णय कांशीराम ने लिया। उस समय बहुतों ने उनके इस फैसले या निर्णय पर चुटकी भी ली होगी, देखों सरकारी नौकरी छोड़कर क्या करने चला है पर कांशीरामजी की जिद्द ने अपने फैसले को सही सिद्ध किया। कड़े फैसले में जोखिम अधिक होता है। इसी प्रकार उदारीकरण एवं भूमंडलीकरण का निर्णय पूर्व प्रधामंत्री नरसिंह राव एवं पूर्व वित्तमंत्री व वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लिया था। इसके परिणामस्वरूप आज विश्व में आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। जहाँ कभी कार एक सपना थी, आज उसी देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई में कारों की लाइन देखी जा सकता है। यह सब संभव हो सका आर्थिक उदारीकरण एवं भूमंडलीकरण के निर्णय से जिसने देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी। प्रारंभ में लोगों ने इन निर्णय की कटु आलोचना। उस सटीक निर्णय के परिणाम ने लोगों को चुप्पी साधने के लिए विवश कर दिया। इतिहास में उदाहरण बहुत है, जहाँ एक सटीक निर्णय ने लोगों की जिंदगी बदल दी।
इसलिए टालने की आदत को छोड़कर सटीक निर्णय पर पहुँचने की आदत डालों। देखना आपके जीवन में परिवर्तन अवश्य ही होगा। आप अपने लक्ष्य को अवश्य ही प्राप्त करने में सक्षम बन सकोगे। दोहरे मानसिकता को छोड़ो किंतु, परंतु लेकिन एवं मगर जैसे शब्दों को अपनी शब्दावली से निकालो, ‘निर्णय लेने’ की आदत विकसित करो।
युवाओं का किसी निर्णय पर न पहुँच पाना उनके कैरियर के लिए हानिकारक होता है। बहुत से युवा इस निर्णय पर नहीं पहुँच पाते, आखिर उन्हें करना क्या है। मैडिकल, इंजनियर या आई.ए.एस. इत्यादि पर उनका दिमाग घूमता रहता है। किसी भी क्षेत्र में सफल न होने की स्थिति में उन्हें घरवालों के ताने सुनने को मिलते हैं कि तू नालायक है, तेरे में योग्यता नहीं। इसके विपरीत वह एक सटीक निर्णय लेकर उस दिशा में बढ़े तो उसे सफलता अवश्य मिलेगी।
आपमें से बहुत से अपनी जीविका अर्जित करने के साधन से खुश नहीं है। इसके पीछे सीधा-सा कारण है। उन्होंने ने उस कार्य के विषय में सोचा नहीं तथा वह बाइचांस इस कार्य में आ गये। धीरे-धीरे वह उसी के आदी हो गए। वे इससे संतुष्ट नहीं होते लेकिन उसे करते है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है, उनमें निर्णय लेने की क्षमता का अभाव। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यह ‘निर्णय’ नहीं लिया कि उन्हें फलां क्षेत्र में कार्य करना है। वे तो बस जीविका अर्जित करना चाहते थे। उन्हें जो मिला वह कर लिया। धीरे-धीरे जिंदगी कट गई। एक उम्र पर आने पर उनमें इतनी क्षमता नहीं रही कि वह उसे छोड़कर कुछ अन्य कार्य कर सके। अंत में सिर्फ पछताते ही रहते है। जिसकी सबसे बड़ी वजह होती है, सही समय पर सही निर्णय न ले पाना।
‘निर्णय’ लेने के लिए साहस की आवश्यकता होती है। यहाँ साहसी और अति उत्साही के बीच के अंतर को समझना पड़ेगा। साहसी वह जो अपना निर्णय स्वयं लेता है। अतिउत्साही वह होता जो उन्हें कहने पर या अन्य को देखकर अपने निर्णय लेता है। आपकी साहस के साथ निर्णय लेने होंगे।

Comments

  1. विजेता बनना हैं तो अपने आप को जगाएं ! Khaaskar Students Ke Liye Motivational Article
    http://gyanbazar.blogspot.com/2017/06/Wake-up-yourself-in-hindi.html

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