अवचेतन मस्तिष्क की शक्ति को पहचाने

अवचेतन मस्तिष्क मानवीय मस्तिष्क का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। मनुष्य के शरीर की समस्त मानवीय गतिविधियों के संचालन में अवचेतन मस्तिष्क को महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जो कुछ सामने घटित हो रहा है, उसका संचालन चेतन मस्तिष्क द्वारा होता है। सामने घटित होने वाली कुछ गतिविधियां ऐसी होती है जो नियमित रूप से होती हैं जैसे आॅफिस से घर आना या स्कूल से घर आना। 



इन दोनों ही स्थितियों में आपका ध्यान कितना ही अन्यत्र लगा होने पर भी आपके कदम आपके घर की तरफ ही लेकर चलेंगेे। इसी कारण आप कभी भी घर का रास्ता नहीं भूलते। इसी प्रकार यदि रात को खाना खाते समय बिजली चली जाए और गुप्प अंधेरा हो जाए। अंधेरे में दिखाई न देने के बावजूद आपका हाथ आपके मुँह में ही जाता है। इसके पीछे छिपे कारण को जानने का प्रयास कभी आप ने किया है? इसके पीछे सीधा साधा सा कारण है, आप  इन दोनांे गतिविधियों के अभ्यस्त हो गये हैं। ये सूचना अवचेतन मस्तिष्क में जाकर फिट हो चुकी है। अवचेतन मस्तिष्क चेतन मस्तिष्क से प्राप्त सूचनाओं का संग्रहण करता है। यदि कंप्यूटर की भाषा में कहा जाए तो अवचेतन मस्तिष्क मानवीय मस्तिष्क की हार्डडिक्स है जहाँ पर सूचनाओं का संग्रहण किया जाता है और समय आने पर उसका उपयोग किया जाता है। सूचना को जिस रूप में चेतन मस्तिष्क, अवचेतन मस्तिष्क को देता है वह उसे उसी रूप में ग्रहण करता है। सूचना सकारात्मक सोच के साथ उत्साहवर्धक में ग्रहण हो जाएगी तो अवचेतन मस्तिष्क में सूचना उसी रूप में फिट हो जाएगी। मानवीय शरीर उसी के अनुसार कार्य करेगा अर्थात सकारात्मक सोच एवं उत्साह के साथ। यदि सूचना सोच एवं उत्साहहीनता या नकारात्मक सोच के साथ ग्रहण की जाएगी तो अवचेतन मस्तिष्क में उसी रूप में फिट होगी और शरीर भी उसी के अनुसार व्यवहार करेगा अर्थात नकारात्मक सोच एवं उत्साहहीनता के साथ ही कार्य करेगा। अभिभावक अपने बच्चे को पढ़ाई में कमजोर कहते रहते हैं। इस प्रकार कमजोर जैसे नकारात्मक शब्द बच्चे के अवचेतन मस्तिष्क में बैठ जाते हैं। वह स्वयं को कमजोर मानने लगता है। उसका परीक्षा परिणाम भी कमजोर निकलता है। इसके उलट यदि उसके अभिभावक उससे कहे कि वह वह पढ़ाई में और अच्छा कर सकते है, उसमें योग्यता है। इस प्रकार शब्द उसके अवचेतन मस्तिष्क में संग्रहित हो जाएगी। वह इस दिशा में प्रयास करेगा और उसका परिणाम बेहतर आने की संभावना भी बढ़ जायेगी। इसी प्रकार अपने अधीनस्थ कार्य करने वाले को निरंतर ताने मारना, तुम कोई भी कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर सकते। इस स्थिति में वह व्यक्ति कोई भी कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पाएगा क्योंकि चेतन मस्तिष्क के द्वारा अवचेतन मस्तिष्क में निरंतर यह संदेश भेजा जा रहा है, तुम कोई कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर सकते।
अभिभावकों एवं शिक्षकों को अपने छात्रों से तथा बाॅस को अपने मातहत कार्य करने वालों से श्रेष्ठ परिणाम लेने हों तो इसके लिए उन्हें सकारात्मक शब्दों का उच्चारण करना ही होगा।
सफलता प्राप्त करने के लिए आपको निर्धारित लक्ष्य अवचेतन मस्तिष्क मंे स्थापित करना होगा। इसके साथ लक्ष्य प्राप्ति के लिए आवश्यक योजना, दृढ़ इच्छा तथा उद्देश्य को भी स्थापित करना होगा। अवचेतन मस्तिष्क को संदेश दो कि आप लक्ष्य के प्रति निष्ठावान हैं और आप हर हाल में लक्ष्य को भेदना चाहते हैं अर्थात लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं। इस तरह के संदेश आपको अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ एवं कृतसंकल्प बनाएंगे जो आपके सफलता के प्रति आश्वस्त करेगा। सफलता प्राप्त करने के लिए आपके अवचेतन मस्तिष्क का भरपूर उपयोग करना होगा। 
सकारात्मक सोच एवं विचार अवचेतन मस्तिष्क के लिए पोषक आहार के समान है। जिस प्रकार पोषक आहार के सेवन से शरीर हृष्ट-पुष्ट एवं ऊर्जावान होता है, उसी प्रकार सकारात्मक सोच एवं विचारो से अवचेतन मस्तिष्क शरीर को उत्साहित होने का आदेश देता है, जिससे लक्ष्य प्राप्त करने के प्रति प्रेरित होते हैं। ऐसा नहीं हो सकता, ये तो बहुत असंभव है, मैं नहीं कर सकता। इस प्रकार कि बातों से बचें अपनी क्षमताओं एवं स्वयं पर विश्वास रखें। आपके मस्तिष्क में निरंतर सकारात्मक एवं नकारात्मक विचार उत्पन्न होते रहते हैं, यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसमें से किसे अपने अवचेतन मस्तिष्क में स्थापित होने का अवसर प्रदान करते है। यदि आप सकारात्मक सोच एवं विचारों को स्थापित करते हैं, तो आप अवश्य ही अपनी मंजिल पाएंगे। यदि आप ऐसा न करके नकारात्मक विचारों को ग्रहण करते है तो आपका अपने लक्ष्य से भटकना तय है। अब एकाग्र होकर सोचो आप किसे चुनना पसंद करेंगे। मर्जी आपकी है फैसला आपका है। अपने अवचेतन मस्तिष्क की शक्ति को पहचाने फिर देखें परिणाम आपके पक्ष में आते हैं या नहीं।
अवचेतन मस्तिष्क का बेहतर उपयोग करने के लिए आप आत्म-अवलोकन के सिद्धांत पर अमल करें। स्वयं से बातें करें, अपनी कमजोरियों एवं नाकामियों का ईमानदारी से विश्लेषण करें। उन तथ्यों एवं बातों पर गौर करने का प्रयास करें, जो आपको लक्ष्य से भटकाती हैं। किन कारणों के चलते आप अपने लक्ष्य से भटक जाते है। आपमें ऐसी कौन सी कमियाँ है, जो अवश्य ही दूर की जानी चाहिएं। इन सब का ईमानदारी से विश्लेषण करने के पश्चात आप इन्हें दूर करने के लिए कृतसंकल्पित हों। अपने अवचेतन मस्तिष्क को संदेश दो मैं इन्हें हर हाल में दूर करने का प्रयास करूंगा। अक्सर देखा जाता है कि लोग इच्छित परिणाम प्राप्त न होने की स्थिति में एक या दो दिन तक तो उस पर आत्म-चिंतन करते है। पर जैसे-जैसे दिन बीतते जाते है, वे उस पर सोचना छोड़ देते हैं। जिंदगी को उसी ढर्रे पर ले जाते हैं, पर पुनः उन्हें आशा के अनुरूप परिणाम नहीं प्राप्त होने पर वे अपनी नाकामयाबी और किस्मत का रोना लेकर बैठ जाते हैं। इसके विपरीत यदि वे उन कारणों को ढूंढ़ने का प्रयास करे जिनके चलते वह असफल हुए हैं, और उन्हें दूर करने संबंधित एक योजना बनाकर उसे अपने अवचेतन मस्तिष्क में डालें। तो आपका अवचेतन मस्तिष्क आपको उस योजना पर अमल करने के लिए प्रेरित करेगा। जिससे आप श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। 
अपने लक्ष्य प्राप्ति की दृढ़इच्छा को साकार करने के लिए अवचेतन मस्तिष्क से साक्षात्कार करना सीखो। अपने अवचेतन मास्तिक को नियंत्रिण करना सीखो। इच्छा, विश्वास, प्रेम, उत्साह, आशा जैसे सकारात्मक मनोभाव अवचेतन मस्तिष्क को पोषित करते हैं। आपको सफलता प्राप्त कराने में यह मनोभाव एक नई दिशा प्रदान कर सकते हंै। इसके विपरित विपरित भय, ईष्र्या, प्रतिशोध, लालच, अंधविश्वास, तथा क्रोध जैसे नकारात्मक मनोभाव आपके अवेचतन मस्तिष्क को कुपोषण का शिकार बना सकते है। सदैव इनसे बचने का प्रयास करें। ये आपको लक्ष्य से भटका सकते है। सफलता की दृष्टि से इनसे दूर रहना ही बेहतर रहता है। सकारात्मक मनोभावों का अपने आदतों में सम्मिलित करने का प्रयास करें। सकारात्मक सोचने पर मस्तिष्क में सकारात्मक आवेशों का प्रवाह होगा, यह सकारात्मक आवेश ही हमारे सकारात्मक विचार में परिवर्तित होंगे। ये सकारात्मक विचार हीे सकारात्मक योजना बनाने में सक्षम होंगे, यह सकारात्मक योजना ही शरीर की सकारात्मक परिणाम की दिशा में प्रेरित करेगी। सकारात्मक परिणाम की दिशा में प्रेरित होने पर ही सफलता प्राप्त होगी। फिर वह सफलता किसी भी रूप में हो चाहें श्रेष्ठ कारोबार स्थापित करने की दिशा में या सफल राजनेता बनने की दिशा में या सफल खिलाड़ी बनने की दिशा में या फिर सफलता की किसी अन्य रूप में ही क्यों न हो जिसे आप चाहते है। जिसका सापना आप ने देखा है।
स्वयं को कमजोर ओर कमतर मत माने स्वयं को सर्वश्रेष्ठ बनाने का हर संभव प्रयास करें। किसी मनोवैज्ञानिक ने कहा है कि Very Child is a unique one अर्थात प्रत्येक बच्चा अपने आप में अद्भूत है। आप भी अपनी छिपी शक्ति ;भ्पकमद च्वूमतद्ध को पहचाने फिर देखें इच्छित परिणाम आते हैं या नहीं।

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